आचार्य भगवत दुबे

(संस्कारधानी जबलपुर के हमारी वरिष्ठतम पीढ़ी के साहित्यकार गुरुवर आचार्य भगवत दुबे जी को सादर चरण स्पर्श । वे आज भी हमारी उंगलियां थामकर अपने अनुभव की विरासत हमसे समय-समय पर साझा करते रहते हैं। इस पीढ़ी ने अपना सारा जीवन साहित्य सेवा में अर्पित कर दिया है।सीमित शब्दों में आपकी उपलब्धियों का उल्लेख अकल्पनीय है। आचार्य भगवत दुबे जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की विस्तृत जानकारी के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें 👉 ☆ हिन्दी साहित्य – आलेख – ☆ आचार्य भगवत दुबे – व्यक्तित्व और कृतित्व ☆. आप निश्चित ही हमारे आदर्श हैं और प्रेरणा स्त्रोत हैं। हमारे विशेष अनुरोध पर आपने अपना साहित्य हमारे प्रबुद्ध पाठकों से साझा करना सहर्ष स्वीकार किया है। अब आप आचार्य जी की रचनाएँ प्रत्येक मंगलवार को आत्मसात कर सकेंगे।  आज प्रस्तुत हैं आपकी एक भावप्रवण रचना – बेशर्मी के ताले।)

✍  साप्ताहिक स्तम्भ – ☆ कादम्बरी # 28 – बेशर्मी के ताले… ☆ आचार्य भगवत दुबे ✍

सत्ता के कानों में हैं

बेशर्मी के ताले 

 

राजनीति में छुटभैये 

बछड़े भर रहे कुलाँचें 

किसको पड़ी जरूरत 

अपना संविधान बाँचें 

कुछ तो बंद किये हैं

कुछ की आँखों में जाले 

 

जहाँ देखिये वहीं घिरे हैं 

आतंकी बादल 

होते हैं विस्फोट 

भला क्या कर लेगी सांकल 

राजनीति की गंगा में

मिल रहे अपावन नाले 

 

सारस्वत मंचों ने 

कैसी ओढ़ी फूहड़ता 

जहाँ चुटकुलेबाज 

बड़ी बेशर्मी से पढ़ता 

कवि-कवित्रियाँ, लगें कि

जीजा, साली औ’ साले

https://www.bhagwatdubey.com

© आचार्य भगवत दुबे

82, पी एन्ड टी कॉलोनी, जसूजा सिटी, पोस्ट गढ़ा, जबलपुर, मध्य प्रदेश

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈

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