महाकवि कालीदास कृत मेघदूतम का श्लोकशः हिन्दी पद्यानुवाद : द्वारा प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

☆ “मेघदूतम्” श्लोकशः हिन्दी पद्यानुवाद # मेघदूत …. उत्तरमेघः ॥२.३६॥ ☆

 

तस्मिन काले जलद यदि सा लब्धनिद्रासुखा स्याद

अन्वास्यैनां स्तनितविमुखो याममात्रं सहस्व

मा भूद अस्याः प्रणयिनि मयि स्वप्नलब्धे कथंचित

सद्यः कण्ठच्युतभुजलताग्रन्थि गाढोपगूढम॥२.३६॥

 

यदि उस समय मेघ वह सो रही हो

तो धर प्रहर भर धैर्य , मत नाद करना

कहीं स्वप्न में कंठ मेरे लगी का

न भुजबंध छूटे न हो भंग सपना

 

© प्रो. चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’   

A १, विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर. म.प्र. भारत पिन ४८२००८

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈

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