संस्थाएं – काव्यस्पंदन संस्था (प्रसिद्धीसाठी नाही, प्रगती साठी), महाराष्ट्र

काव्यस्पंदन संस्था, महाराष्ट्र (प्रसिद्धीसाठी नाही, प्रगती साठी) स्थापना:  29 अप्रैल 2017   दैनंदिन लेखन व्यासंग जोपासणा-या साहित्यिकांचे हक्काचे व्यासपीठ.   पारिवारीक स्नेहबंधातून विविध साहित्य प्रकारांचे ज्ञानार्जन, प्रचार व प्रसार.   काव्यस्पंदन संस्थेमार्फत दोन वर्षाच्या कार्यकाळात सुमारे दोनशे पंधरा राज्यस्तरीय कथा, काव्य, लेख स्पर्धा, उपक्रमांचे  यशस्वी आयोजन.   भजन,  अभंग, ओवी, भारूड, गण, गौळण,पोवाडे,  विडंबन गीत, भावगीत, लावणी अशा अभिजात पारंपरिक साहित्य प्रकारांवर दैनंदिन उपक्रम व कार्यशाळांचे आयोजन.   बालसाहित्यासाठी स्वतंत्र समुह.   म्हणी, वाक्प्रचार, काव्यमय गोष्ट,  उखाणे,  काव्यकोडे आदी साहित्य प्रकारासाठी विशेष स्पर्धा / उपक्रमांचे आयोजन.   साहित्यिकांची मुलाखत. नवीन रवी, नवीन कवी उपक्रम.   नाविन्यता आणि वेविध्य जोपासणा-या काव्यस्पंदन महास्पर्धा अंतर्गत दहा फेर्‍यांचे यशस्वी  आयोजन.   पारिवारीक स्नेहबंध जपणारे अनोखे स्नेहबंधन. काव्यस्पंदन.   समूह प्रशासक -  1) श्री भालचंद्र कऱ्हाडे  2) श्रीमति रंजना लसणे समूह संचालक -  1) कवीराज विजय यशवंत सातपुते  2)कवियित्री संगिता माने संयोजन समिति - 1) डॉ. रवीद्र वेदपाठक  2) श्री अजय रामटेके 3) श्री अजित माने  4)  सुश्री निशिगंधा सदामते   ...
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संस्थाएं – व्यंग्यम (व्यंग्य विधा पर आधारित व्यंग्य पत्रिका/संस्था), जबलपुर

संस्थाएं - व्यंग्यम (व्यंग्य विधा पर आधारित व्यंग्य पत्रिका/संस्था), जबलपुर   विगत दिवस साहित्यिक संस्था व्यंग्यम द्वारा आयोजित 23वीं व्यंग्य पाठ गोष्ठी में सभी ने परम्परानुसार अपनी नई रचनाओं का पाठ किया.  इस संस्था की प्रारम्भ से ही यह परिपाटी रही है कि प्रत्येक गोष्ठी में व्यंग्यकर सदस्य को अपनी नवीनतम व्यंग्य रचना का पाठ करना पड़ता है । इसी संदर्भ में इस व्यंग्य पाठ गोष्ठी में सर्वप्रथम जय प्रकाश पांडे जी ने 'सांप कौन मारेगा,  यशवर्धन पाठक ने  'दादाजी के स्मृति चिन्ह', बसंत कुमार शर्मा जी ने 'अंधे हो क्या', राकेश सोहम जी ने 'खा खाकर सोने की अदा', अनामिका तिवारीजी ने 'हम आह भी भरते हैं',  रमाकांत ताम्रकार जी ने 'मनभावन राजनीति बनाम बिजनेस', ओ पी सैनी ने 'प्रजातंत्र का स्वरूप', विवेक रंजन श्रीवास्तव ने 'अविश्वासं फलमं दायकमं', अभिमन्यु जैन जी ने 'आशीर्वाद', सुरेश विचित्रजी ने 'शहर का कुत्ता', रमेश सैनी जी ने 'जीडीपी और दद्दू', डा. कुंदनसिंह परिहार जी ने 'साहित्यिक लेखक की पीड़ा' व्यंग्य रचनाओं का पाठ...
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संस्थाएं – पृथा फाउंडेशन, पुणे

पृथा फाउंडेशन, पुणे  सुश्री मीनाक्षी भालेराव  संस्थापक - अध्यक्ष  (Please click on following photograph for more information) ⇓   हर एक इंसान में एक इंसान और रहता है जो बचना चाहता है अपने इंसान होने को   ...
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संस्थाएं – विश्व वाणी हिंदी संस्थान जबलपुर : : समन्वय प्रकाशन अभियान जबलपुर

विश्व वाणी हिंदी संस्थान जबलपुर : : समन्वय प्रकाशन अभियान जबलपुर (हिंदी के विकास हेतु समर्पित स्वैच्छिक, अव्यवसायिक, अशासकीय संस्था) सञ्चालन समिति: अध्यक्ष:  आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' जबलपुर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष: अभियंता अरुण अर्णव खरे भोपाल उपाध्यक्ष: गोपाल बघेल कनाडा, परामर्शदाता: आशा वर्मा, डॉ. आरती प्रसाद अल्बुकर्क, संजीव वर्मा रोचेस्टर, डॉ. राजीव वर्मा ओंटेरियो, अर्चना नोगरैया राज यू के., मुख्यालय प्रभारी: अभियंता विवेकरंजन 'विनम्र', कार्यालय प्रभारी: बसंत शर्मा, कार्यालय सचिव:  मिथलेश बड़गैया, वित्त सचिव:  डॉ. साधना वर्मा, संस्कृति सचिव:  पं, कामता तिवारी,  आशा रिछारिया, सह सचिव:  दिनेश सोनी, कार्यकारिणी सदस्य:  निहारिका सरन कोलम्बस, पूजा अनिल स्वीडन, डॉ. प्रार्थना निगम उज्जैन, प्रो. किरण श्रीवास्तव रायपुर, जयप्रकाश श्रीवास्तव, प्रकोष्ठ प्रभारी उद्देश्य तथा गतिविधियाँ- अ. हिंदी भाषा के व्याकरण, पिंगल, साहित्य, शोध आदि संबंधी मौलिक विचारों/योजनाओं को प्रोत्साहित/क्रियान्वित/प्रकाशित करना। आ. सदस्य निर्धारित कार्यक्रमों का  स्वयं के तथा जुटाए गए संसाधनों से क्रियान्वयन करेंगे। इ. सदस्यता शुल्क संरक्षक ११,००० रु., आजीवन ६,००० रु., वार्षिक ११०० रु., विद्यार्थी स्वैच्छिक। ई. सदस्य बहुमत से प्रतिवर्ष सञ्चालन समिति का चुनाव करेंगे। उ. सदस्यता राशि बैंक में जमा कर उसके ब्याज से गतिविधियाँ संचालित की जायेंगी। ऊ. प्रति वर्ष संस्था का आय-व्यय सदस्यों को सूचित किया जायेगा। ए. सञ्चालन समिति सदस्यों...
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संस्थाएं – पाथेय  साहित्य कला अकादमी जबलपुर मध्य प्रदेश

पाथेय  साहित्य कला अकादमी जबलपुर मध्य प्रदेश (पाथेय साहित्य कला अकादमी संस्कारधानी जबलपुर की प्रतिष्ठित संस्थाओं में से एक है। यह संस्था  डॉ.राजकुमार तिवारी 'सुमित्र' और उनकी जीवनसंगिनी डॉ. गायत्री तिवारी का दिवा स्वप्न है।) वरिष्ठ साहित्यकार पत्रकार डॉ.राजकुमार तिवारी 'सुमित्र' और उनकी जीवनसंगिनी डॉ. गायत्री तिवारी ने अक्टूबर 1995 को पाथेय  प्रकाशन, पाथेय संस्था और पाथेय साहित्य कला अकादमी की स्थापना की. प्रारंभ में अकादमी ने पारिवारिक स्तर पर प्रियजनों की स्मृति में, विविध विषयों के लिए 2100 और 1100 के 16 पुरस्कार प्रारंभ किए. निर्णय प्रविष्टियों के आधार पर होता था. 8 सितंबर 2015 को डॉ.गायत्री तिवारी के देहावसान से उत्पन्न स्थिति के कारण पुरस्कार योजना बंद कर दी गई. 27 दिसंबर 2015 से ही अकादमी ने 'गायत्री जन्म स्मृति' मनाने का निश्चय किया. गायत्री कथा सम्मान के लिए 11000 की राशि निश्चित की गई. गायत्री सृजन सम्मान से नगरीय क्षेत्रीय प्रतिभाओं को सम्मानित करने का निर्णय लिया गया. गायत्री कथा सम्मान से अब तक सम्मानित कथाकार - सन 2015 - श्री राजेंद्र दानी  सन 2016 - श्री कैलाश...
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संस्थाएं – वर्तिका (संस्कारधानी जबलपुर की साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था)

वर्तिका (संस्कारधानी जबलपुर की साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था) (वर्तिका की जानकारी आपसे साझा कराते हुए मुझे अत्यन्त गर्व का अनुभव हो रहा है। यह एक संयोग है की 1981-82 में मैंने वाहन निर्माणी प्रबंधन के सहयोग तथा स्व. साज जबलपुरी एवं मित्रों के साथ साहित्य परिषद, वाहन निर्माणी, जबलपुर की नींव रखी थी। 1983 के अंत में जब साज भाई के मन में वर्तिका की नींव रखने के विचार प्रस्फुटित हो रहे थे, उस दौरान मैंने भारतीय स्टेट बैंक ज्वाइन कर लिया। नौकरी के सिलसिले में जबलपुर के साथ साज भाई का साथ भी छूट गया। 34 वर्षों बाद जब डॉ विजय तिवारी 'किसलय' जी और वर्तिका के माध्यम से  पुनः मिलने का वक्त मिला तब अक काफी देर हो चुकी थी। नम नेत्रों से उनकी निम्न पंक्तियाँ याद आ रही हैं - मैंने मुँह को कफन में छुपा लिया, तब उन्हें मुझसे मिलने की फुर्सत मिली .... हाल-ए-दिल पूछने जब वो घर से चले, रास्ते में उन्हें मेरी मैयत मिली .... साज...
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संस्थाएं – वर्जिन साहित्यपीठ: एक अभियान (निःशुल्क ईबुक्स एवं पुस्तक प्रकाशन*)

वर्जिन साहित्यपीठ: एक अभियान (निःशुल्क ईबुक्स एवं पुस्तक प्रकाशन*) (आज जब  नामचीन एवं राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरुस्कृत लेखकों / सेलेब्रिटीज के अतिरिक्त शेष लेखकों के लिए  पारम्परिक प्रकाशन के द्वार लगभग बन्द हो चुके हैं, ऐसे समय में  स्व-प्रकाशन (Self-Publication) एक बड़े व्यवसाय के रूप में उभरा है। यहाँ तक कि किसी भी  प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय  साहित्य /ग्रंथ अकादमी  जैसे संस्थानों  से अपनी पुस्तकें प्रकाशित करना  स्वप्न देखने जैसा है।  ईबुक्स जैसे निःशुल्क प्रकाशन के क्षेत्र में अमेज़न, गूगल प्ले स्टोर आदि विशेष भूमिकाएँ निभा रहे हैं। ऐसे में  श्री ललित कुमार मिश्र  द्वारा  "वर्जिन साहित्यपीठ" जैसी संस्था के माध्यम से  निःशुल्क ईबुक्स एवं पुस्तक प्रकाशन लेखकों के लिए एक अभियान ही नहीं संजीवनी भी है।) इस यात्रा की शुरुआत से पूर्व इसकी पृष्ठभूमि की चर्चा करना चाहूंगा। उन दिनों कॉलेज में प्रवेश लिया ही था, जब लेखन आरम्भ हुआ। वर्ष था 1993 और लेखन की वजह वही, जो ज्यादातर लेखक मित्रों के लेखन की होती है। करीब एक वर्ष पश्चात वजह...
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संस्थाएं – “LifeSkills”, Indore

(LifeSkills is a mission of Bisht couple (Shri Jagat Singh Bisht and Smt. Radhika Jagat Bisht) that creates a pathway to authentic happiness, well-being and a fulfilling life with objective to provide skills that make life happier, meaningful and worth living.  LifeSkills equips us with sustainable scientific tools to cultivate a happy and fulfilling life with a greater sense of well-being.) LifeSkills (A Pathway to Authentic Happiness, Well-being and a Fulfilling Life)  Do you want to be happier? Would you like to increase your well-being and flourish? We help you do that!  Let us begin with a quick overview by watching this short video:   What is LifeSkills? LifeSkills is a pathway to authentic happiness, well-being and a fulfilling life. Our objective is to provide skills that make life happier, meaningful and worth living. LifeSkills equips you with sustainable scientific tools to cultivate a happy and fulfilling life with a greater sense of well-being. What do you do? We conduct: Retreats Workshops Seminars Talks Trainings One-On-One Coaching For Individuals, Institutions, Communities, Workplaces...
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संस्थाएं – “हैल्पिंग हेण्ड्स – फॉरएवर वेल्फेयर सोसायटी” 

“हैल्पिंग हेण्ड्स – फॉरएवर वेल्फेयर सोसायटी”  Helping Hands – Forever Welfare Society आज के संवेदनहीन एवं संवादविहीन होते समाज में भी कुछ संवेदनशील व्यक्ति हैं, जिन पर समाज का वह हिस्सा निर्भर है जो स्वयं को असहाय महसूस करता है। ऐसे ही संवेदनशील व्यक्तियों की संवेदनशील अभिव्यक्ति का परिणाम है “हैल्पिंग हेण्ड्स – फॉरएवर वेल्फेयर सोसायटी” जैसी संस्थाओं का गठन। इस संस्था की नींव रखने वाले समाज-सेवा को समर्पित आदरणीय श्री देवेंद्र सिंह अरोरा  (अरोरा फुटवेयर, जबलपुर के संचालक) एक अत्यंत संवेदनशील व्यक्तित्व के धनी हैं, जो यह स्वीकार करने से स्पष्ट इंकार करते हैं कि- वे इस संस्था की नींव के पत्थर हैं। उनका मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति जो इस संस्था से जुड़ा है वह इस संस्था की नींव का पत्थर है। यह श्री अरोरा जी का बड़प्पन है एवं उनकी यही भावना संस्था के सदस्यों को मजबूती प्रदान करती है। प्रत्येक संस्था में कई अवयव होते हैं किन्तु कोई भी संस्था मात्र एक अवयव पर खड़ी रहती है जिसे...
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