हिन्दी साहित्य- पुस्तक -आत्मकथ्य /विवेचना – ☆ द्वीप अपने अपने ☆ डॉ मुक्ता (विवेचना – डा•सुभाष रस्तोगी)

काव्य संग्रह  – द्वीप अपने अपने – डॉ. मुक्ता  आत्मकथ्य - डॉ.मुक्ता विवेचना - डॉ. सुभाष रस्तोगी    ☆ आत्मकथ्य  - संवेदनाओं का झरोखा ☆ - डॉ. मुक्ता ‘द्वीप अपने अपने’ विभिन्न मनःस्थितियों को उकेरता रंग-बिरंगे पुष्पों का गुलदस्ता है, जो उपवन की शोभा में चार चांद लगाते हैं। उपवन में कहीं महकते पुष्पों पर गुंजार करते भंवरे मन को आह्लादित, प्रफुल्लित व आनंदित करते हैं, तो कहीं कैक्टस के सुंदर रूप भी मन को आकर्षित करते हैं। मलय वायु पूरे वातावरण को महका देती है और मानव मदमस्त होकर प्रकृति के सौंदर्य से अभिभूत हो जाता है। परन्तु प्रकृति पल-पल रंग बदलती है। ऋतु परिवर्तन अंतर्मन को ऊर्जा से परिपूर्ण कर देता है क्योंकि मानव थोड़े समय तक किसी विशेष स्थिति में रहने से ऊब जाता है। मानव नवीनता का क़ायल है और लम्बे समय तक उसी स्थिति में रहना उसे मंज़ूर नहीं क्योंकि एकरसता जीवन में नीरसता लाती है। सो! वह उस स्थिति से शीघ्रातिशीघ्र छुटकारा पाना चाहता है। मानव बनी बनाई लीक...
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हिन्दी साहित्य- पुस्तक समीक्षा – ☆ बँटा हुआ आदमी ☆ डॉ मुक्ता (समीक्षक – श्रीमती माधुरी पालावत)

भाव कथा संग्रह  – बँटा हुआ आदमी – डॉ. मुक्ता  समीक्षक - श्रीमती माधुरी पालावत बँटा हुआ आदमी (भाव कथा संग्रह) : लेखिका डॉ. मुक्ता, प्रकाशक - पेसिफिक बुक्स इन्टरनेशनल, 108 फ़र्स्ट फ्लोर, 4832 /24 प्रहलाद स्ट्रीट, अंसारी  रोड़, दरियागंज, नई दिल्ली 110002 मूल्य - 220/…रू. फ्लिपकार्ट लिंक -  बँटा हुआ आदमी (भाव कथा संग्रह)   श्रीमती डॉ. मुक्ता जी की भाव रचनाओं की नवीन कृति है 'बँटा हुआ आदमी' स्वत: सिद्ध है । उनका भावुनुभूति का क्षेत्र अधिक सक्रिय है । उनके मानस में जो सहज स्पन्दन हुए है वे लिखती गई । उनकी भावना और संवेदना से प्रेरित यह कृति प्रकाशित हुई है । इसीलिए इस कृति में मणि को निर्मिति की प्रक्रिया पूरी हुई । डॉ. मुक्ता जी ने अपनी अनुभूति विशेषकर अन्तर्निहित भावानुभूति को अक्षरबद्ध किया है और इस प्रकार उनका मन रचनाओं को मणि बना सका है और बिना किसी कलात्मक करतूत या कौशल के स्वयं रचना के एक विशेष रूप या प्रकार में ढ़ल गई जैसे कार्बन हीरा बन गया हो...
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हिन्दी साहित्य- पुस्तक समीक्षा – ☆ नवरंग ☆ संपादक श्री पवन गहलोत – (समीक्षक – सुश्री मालती मिश्रा ‘मयन्ती’)

समीक्षक : सुश्री मालती मिश्रा ‘मयंती’   साझा काव्य संकलन - नवरंग - संपादक : श्री पवन गहलोत    गतिमान समय के हर पल के अलग ही रंग अलग ही अनुभव होते हैं, ये बदलते रंग व्यक्ति को कटु-मृदु, सरस-नीरस, हर्ष-विषाद व संयम-व्याकुलता आदि विभिन्न रंगों से परिचित कराते हैं। कलम के पुजारी इन्हीं रंगों में अपनी लेखनी डुबोकर नवीन कृतियों का सृजन कर डालते हैं। ऐसे नव-नवीन रंगों से सुसज्जित है यह साझा काव्य संकलन 'नवरंग'। काव्य के विविध नवीन रंगों से सज्ज इस साझा संकलन का द्विअर्थी नाम ही बेहद आकर्षक है। इसमें नौ कवियों की नौ-नौ रचनाओं को बेहद खूबसूरती से संकलित किया गया है। पवन गहलोत जी के कुशल संपादन में संकलित इस पुस्तक में जीवन के खट्टे-मीठे, सरस-नीरस सभी रंग मुखरित हुए हैं। कविता लेखन साहित्य की वह विधा है, जिसमें किसी कहानी या मनोभावों को कलात्मक रूप से भाषा के द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है। इस पुस्तक की सभी रचनाएँ कवि हृदय से निकलकर पाठक के हृदय पर ...
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हिन्दी साहित्य- पुस्तक समीक्षा – ☆ जीभ अनशन पर है ☆ श्रीमति समीक्षा तैलंग – (समीक्षक – श्री दीपक गिरकर)

व्यंग्य संग्रह  – जीभ अनशन पर है – श्रीमति समीक्षा तैलंग    ☆  विविध रंगों की व्यंग्य रचनाओं का रोचक संग्रह है ” जीभ अनशन पर है “ ☆   हिंदी व्यंग्य लेखन में महिला लेखिकाओं की संख्या बहुत कम रही हैं। लेकिन अब इस विधा में कुछ महिलाएं अपनी सशक्त व्यंग्य रचनाओं के साथ आ रही हैं, इनमें समीक्षा तैलंग व्यंग्य के आकाश में एक चमकता सितारा बनकर उभर रही है। नयी पीढ़ी की होनहार लेखिका समीक्षा तैलंग का प्रथम व्यंग्य संग्रह  “ जीभ अनशन पर है ” इन दिनों काफी चर्चा में है। समीक्षा पेशे से पूर्व पत्रकार है और जब से वे आबू धाबी में रहने लगी है तब से वे लगातार व्यंग्य, कविता, फीचर, साक्षात्कार, निबंध, लेख, कहानी, संस्मरण इत्यादि विधाओं में साहित्य जगत में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रही है। देश के विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाओं में समीक्षा की रचनाएं निरंतर प्रकाशित हो रही हैं. लेखिका पत्रकार थी, इसलिए वे अपनी पारखी नजर से अपने आसपास के परिवेश की विसंगतियों, विद्रूपताओं को उजागर...
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हिन्दी साहित्य- पुस्तक समीक्षा – ☆ बिन गुलाल के लाल ☆ श्री मनोज श्रीवास्तव – (समीक्षक – श्री राजेंद्र पण्डित)

काव्य संग्रह  – बिन गुलाल के लाल – श्री मनोज श्रीवास्तव    ☆ अद्भुत, अनुपम और अद्वितीय कृति ☆   कविता केवल शब्दों का कुशल संयोजन नहीं अपितु भावों का यथावत सम्प्रेषण भी है. रचनाकार को चाहिए कि वह यह भी ध्यान रखे कि उसकी रचना मस्तिष्क का कचरा न होकर ह्रदय की मथानी से मथकर निकला हुआ नवनीत है. इस प्रकार के विचार श्रेष्ठ कवि मनोज श्रीवास्तव की इस पुस्तक "बिन गुलाल के लाल" को पढ़ कर स्वतः कौंधने लगते है. मनोज जी का मूल स्वर ओज का है किन्तु लगभग सभी रसों में इनकी रचनाएँ मैंने मंचों पर इनसे सुनी है. हास्य-व्यंग्य में भी उतनी ही महारत हासिल है जितनी इन्हें वीर रस में महारत है. अपनी ओज की कविताओं में रचनाकार जहां एक और प्रांजल शब्दों का प्रयोग करके भाव सौन्दर्य के साथ-साथ नाद सौन्दर्य भी प्रतिपादित करता है वही अपनी हास्य-व्यंग्य कविताओं में इस बात का पूरा ध्यान रखता है कि कठिन शब्दों के बोझ के नीचे दबकर संप्रेषणीयता कही मर न...
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हिन्दी साहित्य- पुस्तक समीक्षा – ☆ कोहरे में सुबह ☆ श्री ब्रजेश कानूनगो – (समीक्षक – श्री दीपक गिरकर)

काव्य संग्रह  - कोहरे में सुबह - श्री ब्रजेश कानूनगो     ☆ उम्मीदों की रोशनी से जगमग करने वाला समकालीन रचनाओं का एक अनूठा काव्य संग्रह है “कोहरे में सुबह” ☆   “कोहरे में सुबह” चर्चित वरिष्ठ कवि-साहित्यकार श्री ब्रजेश कानूनगो की कविता यात्रा का चौथा पड़ाव हैं। इसके पूर्व इनके “धूल और धुएं के परदे में” (1999), “इस गणराज्य में” (2014), “चिड़िया का सितार” (2017) काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। “कोहरे में सुबह” एक ऐसा कविता संग्रह है जो कई मुद्दों और विषयों पर प्रकाश डालता है। श्री ब्रजेश कानूनगो ने अपने कविता संग्रह “कोहरे में सुबह” में अपने जीवन के कई अनुभवों को समेटने की कोशिश की है। “कोहरे में सुबह” उलझन भरे कोहरे में उम्मीदों की रोशनी से जगमग करने वाला एक अनूठा काव्य संग्रह है। ब्रजेशजी ज़मीन से जुड़े हुए एक वरिष्ठ कवि है। इस संग्रह में प्रकृति, प्रेम, गाँव और ग्रामीण जीवन की स्थितियों को अभिव्यक्त करती कविताएं हैं। यह समकालीन कविताओं का एक सशक्त दस्तावेज़ है। इस...
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हिन्दी साहित्य- पुस्तक समीक्षा – * अश्वत्थामा यातना का अमरत्व * सौ. अनघा जोगलेकर– (समीक्षक – श्री दीपक गिरकर)

ऐतिहासिक उपन्यास – अश्वत्थामा यातना का अमरत्व – सौ. अनघा जोगलेकर अश्वत्थामा के आपराधिक बोध और आत्मग्लानि का दस्तावेज है उपन्यास “ अश्वत्थामा यातना का अमरत्व ” अनघा जोगलेकर का ऐतिहासिक उपन्यास अश्वत्थामा यातना का अमरत्व इन दिनों काफी चर्चा में है। इस उपन्यास के पूर्व अनघा जी की तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इस उपन्यास में अनघा जी ने महाभारत युद्ध के एक ऐसे योद्धा पर अपनी कलम चलाई है जिसका उल्लेख अधिक नहीं है। यह उपन्यास शापित योद्धा अश्वत्थामा के आपराधिक बोध और आत्मग्लानि की अभिव्यक्ति का दस्तावेज है। लेखिका ने इस उपन्यास में अश्वत्थामा के दृष्टिकोण से महाभारत की कुछ पहलुओं को बहुत ही रोचक तरीके से प्रस्तुत किया हैं। हस्तिनापुर के कुलगुरू द्रोणाचार्य का पुत्र अश्वत्थामा एक सर्वगुण संपन्न महारथी था लेकिन उसने अधर्म का साथ दिया। लेकिन अश्वत्थामा से ऐसा कौन सा अक्षम्य अपराध हुआ कि श्रीकृष्ण को मजबूर होकर उसे यातना के अमरत्व का श्राप देना पड़ा, जिसका फल वह अभी तक भोग रहा है।...
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पुस्तक समीक्षा / आत्मकथ्य – ☆ स्त्री-पुरुष की कहानी ☆ शीघ्र प्रकाश्य _ – श्री सुरेश पटवा

श्री सुरेश पटवा   (श्री सुरेश पटवा, ज़िंदगी की कठिन पाठशाला में दीक्षित हैं। मेहनत मज़दूरी करते हुए पढ़ाई करके सागर विश्वविद्यालय से बी.काम. 1973 परीक्षा में स्वर्ण पदक विजेता रहे हैं और कुश्ती में विश्व विद्यालय स्तरीय चैम्पीयन रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक से सेवा निवृत सहायक महाप्रबंधक हैं, पठन-पाठन और पर्यटन के शौक़ीन हैं। वर्तमान में वे भोपाल में निवास करते हैं। आपकी नई पुस्तक ‘स्त्री-पुरुष की कहानी ’ जून में प्रकाशित होने जा रही हैं जिसमें स्त्री पुरुष के मधुर लेकिन सबसे दुरुह सम्बंधों की मनोवैज्ञानिक व्याख्या भारतीय और पाश्चात्य दर्शन में तुलनात्मक रूप से की गई है। प्रस्तुत हैं उसके कुछ अंश।)   ☆ स्त्री-पुरुष की कहानी ☆ मेरी एक पुस्तक “स्त्री-पुरुष की कहानी” जून में प्रकाशित होने जा रही हैं जिसमें स्त्री पुरुष के मधुर लेकिन सबसे दुरुह सम्बंधों की मनोवैज्ञानिक व्याख्या भारतीय और पाश्चात्य दर्शन में तुलनात्मक रूप से की गई है। प्रस्तुत हैं उसके कुछ अंश। भारतीय दर्शन शास्त्र में संसारी के लिए वर्णित चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम,...
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पुस्तक समीक्षा/प्राक्कथन : ☆ भाव संवेदना का नैवेद्य रूपः ’’नेहांजलि’’☆ – डॉ राम विनय सिंह

नेहांजलि - डॉ प्रेम कृष्ण श्रीवास्तव              भाव संवेदना का नैवेद्य रूपः ’’नेहांजलि’’ (प्रस्तुत है डॉ प्रेम कृष्ण श्रीवास्तव जी के काव्य संग्रह "नेहांजलि" पर डॉ राम विनय सिंह, अध्यक्ष हिन्दी साहित्य समिति, एसोसिएट प्रोफेसर, संस्कृत विभाग, डी0ए0वी0 (पी0जी0) कॉलेज,  देहरादून, उत्तराखण्ड के सकारात्मक एवं सार्थक विचार।)    Amazon Link – >>>>  नेहांजलि  Flipkart Link – >>>>  नेहांजलि  bookscamel.com -  >>>>  नेहांजलि   काव्य मानव-मन के सत्व चिन्तन से समुदगत वह शब्द-चित्र है जो रस- वैभिन्नय में भी आहलाद के धरातल पर सर्वथा साम्य की स्थापना करता है। जीवन के प्रत्येक रंग में प्राकाशिक भंगिमा की अलौकिक आनुभूतिक छटा की साकार शाब्दी- स्थापना काव्य का अभिप्रेत है। वाच्य-वाचक सम्बन्ध से सज्जित शब्दार्थ मात्र से भिन्न व्यंग्य-व्यंजक सम्बन्ध की श्रेष्ठता के साथ व्यंग्य-प्राधान्य में काव्य के औदात्य के दर्शन का रहस्य भी तो यही है। अन्यथा तो शब्द कोष मात्र ही महाकाव्य का मानक बन जाता। लोक में लोकोत्तर का सौन्दर्य बोध क्योंकर उतरता! नितान्त नीरव मन में अदृश्य अश्राव्य ध्वनि के संकेत प्रकृत पद से पृथक अर्थबोध...
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हिन्दी साहित्य- पुस्तक समीक्षा – * भारत में जल की समस्या एवं समाधान  * श्री रमेश चंद्र तिवारी – (समीक्षक – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र‘)

भारत में जल की समस्या एवं समाधान -  श्री रमेश चन्द्र तिवारी न्यायालय के आदेश के परिपालन में लिखी गई किताब - भारत में जल की समस्या एवं समाधान लेखक - रमेश चंद्र तिवारी मूल्य - २८० रु पृष्ठ २७४ शकुंतला प्रकाशन, २१७६, राइट टाउन , जबलपुर टिप्पणीकार - इंजी विवेक रंजन श्रीवास्तव , मो ७०००३७५७९८ जबलपुर   सामान्यतः किताबें लेखक के मनोभावो की अभिव्यक्ति स्वरूप लिखी जाती हैं, जिन्हें वह सार्वजनिक करते हुये सहेजना चाहता है जिससे समाज उनसे लम्बे समय तक अनुप्राणित होता रह सके. पर्यावरण पर अनेक विद्वानो ने समय समय पर चिंता जताई है. मैंने भी मेरी किताब जल जंगल और जमीन भी इसी परिप्रेक्ष्य में लिखी थी. भारत में जल की समस्या एवं समाधान श्री रमेश चंद्र तिवारी की पुस्तक इस मामले में अनोखी है कि यह किताब माननीय उच्च न्यायालय के एक निर्णय के परिपालन में लिखी गई है. पृष्ठभूमि यह है कि श्री रमेश चंद्र तिवारी वन विभाग में सेवारत थे, उनके सेवाकाल में उन्हें विभिन्न पदो पर अवसर मिले कि...
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