मेरा परिचय 

जन्म : 2 जून 1957

14 वर्ष की आयु से स्वांतः सुखाय रचित कुछ कवितायें, कहानियाँ एवं लघु उपन्यास विभिन्न पत्र पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों में प्रकाशित। वर्तमान में स्वतंत्र लेखन।

स्वर्गीय पिताश्री द्वारा अस्सी के दशक के प्रारम्भ में श्रद्धेय डॉ राजकुमार तिवारी ‘सुमित्र’ जी से सम्पर्क कराना एक संयोग ही नहीं मेरे जीवन की एक अनन्य घटना थी। इनके अदृश्य आशीष मुझे सम्पूर्ण  जीवन लेखन हेतु प्रेरित करते रहे।

जीवन में घटनाएँ घटित होती रहीं और साहित्य सृजन के लिए तथ्य मिलते गए। मेरे संवेदनशील मन को वे घटनाएँ प्रेरित करती रहीं। यदि मैं उन्हें लिपिबद्ध नहीं करता तो निश्चित ही यह मेरे संवेदनशील हृदय के साथ अन्याय होता और मुझे स्वयम को क्षमा कर पाना असंभव था। सत्य का सामना अत्यन्त कठिन होता है और उसे शत-प्रतिशत लिपिबद्ध करना उससे भी अधिक कठिन। शायद, इसीलिए यह कहना आवश्यक है कि समस्त साहित्यकारों एवं सृजनकर्मियों के साहित्य एवं कला सृजन वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए धरोहर हैं। इन्हें आत्मसात करने के लिए आवश्यक है आपका सकारात्मक दृष्टिकोण।

वर्तिका (साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था)  जबलपुर द्वारा “वर्तिका राष्ट्रीय सृजन शिरोमणि अलंकरण 2016”

पाथेय साहित्य एवं कला अकादमी, जबलपुर द्वारा गायत्री सृजन सम्मान 2018”

निम्नलिखित पुस्तकें (पेपरबेक) एवं अमेज़न किंडल  (ई-बुक)संस्करण के रूप प्रकाशित एवं अमेज़न पर उपलब्ध हैं ।

निम्नलिखित पुस्तक (पेपरबेक) संस्करण के रूप प्रकाशित एवं पाथेय प्रकाशन, जबलपुर में पर उपलब्ध हैं ।

हेमन्त बावनकर 

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