हिन्दी साहित्य – हिन्दी आलेख – ☆अर्धनारीश्वर व उर्वशी मिथक ☆ – श्री सुरेश पटवा

श्री सुरेश पटवा   (श्री सुरेश पटवा, ज़िंदगी की कठिन पाठशाला में दीक्षित हैं। मेहनत मज़दूरी करते हुए पढ़ाई करके सागर विश्वविद्यालय से बी.काम. 1973 परीक्षा में स्वर्ण पदक विजेता रहे हैं और कुश्ती में विश्व विद्यालय स्तरीय चैम्पीयन रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक से सेवा निवृत सहायक महाप्रबंधक हैं, पठन-पाठन और पर्यटन के शौक़ीन हैं। वर्तमान में वे भोपाल में निवास करते हैं। आपकी नई पुस्तक ‘स्त्री-पुरुष की कहानी ’ जून में प्रकाशित होने जा रही हैं जिसमें स्त्री पुरुष के मधुर लेकिन सबसे दुरुह सम्बंधों की मनोवैज्ञानिक व्याख्या भारतीय और पाश्चात्य दर्शन में तुलनात्मक रूप से की गई है। प्रस्तुत हैं उसका  एक प्रमुख अंश।) ☆ स्त्री-पुरुष की कहानी ☆ ☆ अर्धनारीश्वर व उर्वशी मिथक ☆ भारतीय चिंतन परम्परा में शिव में समाहित शक्ति और शक्ति मे निहित शिव याने अर्धनारीश्वर का मिथक और इंद्र की सभा की सर्वश्रेष्ठ अप्सरा उर्वशी का मिथक नारी की सामाजिक स्थिति के प्रतिनिधि विचार रहे हैं। अर्धनारीश्वर में नारी शक्ति है जो शिव को ग्रहण करके उनका पुरुषार्थ पा रही...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ – ☆ स्मृतियाँ/Memories – #2 – बटुवा ☆ – श्री आशीष कुमार

श्री आशीष कुमार (युवा साहित्यकार श्री आशीष कुमार ने जीवन में  साहित्यिक यात्रा के साथ एक लंबी रहस्यमयी यात्रा तय की है। उन्होंने भारतीय दर्शन से परे हिंदू दर्शन, विज्ञान और भौतिक क्षेत्रों से परे सफलता की खोज और उस पर गहन शोध किया है। अब  प्रत्येक शनिवार आप पढ़ सकेंगे उनकी लेखमाला  के अंश "स्मृतियाँ/Memories"।  आज प्रस्तुत है इस लेखमाला की दूसरी कड़ी "बटुवा" जिसे पढ़कर आप निश्चित ही बचपन की स्मृतियों में खो जाएंगे। किन्तु, मुझे ऐसा क्यूँ लगता है कि युवा साहित्यकार आशीष का हृदय समय से पहले बड़ा हो गया है या समय ने उसे बड़ा कर दिया है।? बेहद सार्थक रचना। )    ☆ स्मृतियाँ/Memories – #2 – बटुवा ☆   बटुवा  स्कूल में एक दोस्त के पास देखा तो मैं भी जिद्द करने लगा पापा ने दिला दिया, पूरे 9 रूपये का आया था 'बटुआ' मैं बहुत खुश था की अपनी गुल्लक में से निकालकर दो, एक रुपये और एक दो रुपये का नोट अपने नए बटुए में रखूँगा उस बटुए में पीछे...
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हिन्दी साहित्य – कविता ☆ हे मातृ भूमि ! ☆– श्री माधव राव माण्डोले “दिनेश”

श्री माधव राव माण्डोले “दिनेश”   ☆ हे मातृ भूमि! ☆    है क्यों घमासान? तेरे आँचल में, सभी तेरे लाल हैं, फिर क्यों है, कोई हरा, कोई नीला, कोई भगवे रूप में, कभी,  सभी...., तेरे लिए लड़ते थे, अब, सभी आपस में लड़ते हैं, बदनाम तेरे आँचल को करते हैं, तेरे पुत्र नहीं, कुछ पराये से लगते हैं, पैदा कर कुछ ऐसा भूचाल, हो जायें सारे आडम्बरी बेहाल, दुनिया सारी अचंभित हो जाये, पड़ोसी भी थर्रा जाये, वीरों का खून भी, अब खौलता है, सफेदपोश भी, बे-तुका सा बोलता है, हे मातृ भूमि, क्युं अब कोई...... महात्मा जैसा, क्युं अब कोई....... अम्बेडकर जैसा, क्युं अब कोई........ टैगौर जैसा, क्युं अब कोई.......... पटेल जैसा, जन्म नही लेता, तेरी कोख से, हे मातृ भूमि, कर दे कुछ ऐसा, सभी में हो, देश भक्ति भाव, एक जैसा......वंदे मातरम.....!   © माधव राव माण्डोले “दिनेश”, भोपाल  (श्री माधव राव माण्डोले “दिनेश”, दि न्यू इंडिया एश्योरंस कंपनी, भोपाल में सहायक प्रबन्धक हैं।)...
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मराठी साहित्य – मराठी कविता – ☆ व्रुत्त आनंदकंद ☆ – सुश्री विजया देव

सुश्री विजया देव ☆ व्रुत्त आनंदकंद ☆ –  (वरिष्ठ मराठी साहित्यकार सुश्री विजया देव जी  की एक  भावप्रवण व्रुत्तबध्द  मराठी कविता।)   माझ्या घरी उन्हाने मुक्काम ठोकलेला शोधून राहिलो मी माझ्याच सावलीला बेभान धावलो मी वेडात वागलो मी त्या आरशात जेव्हा मी पाहिले स्वताला   ऊगाच मीळते कां ती सांत्वना कुणाची रक्तात पाय न्हाले कुरवाळले दुखाला नाकारले सदा मी ते प्रेम दांभि कांचे समजावले कितीदा माझ्याच या मनाला देहावरी भरोसा कां ठेव लाच तेव्हा आत्म्यास कांविसरलो दुरावलो सुखाला झोळीत आज माझ्या ओतून चंद्रतारे ये साजणी तु आता घेवून दीपमाला   ©  विजया देव, पुणे ...
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योग-साधना LifeSkills/जीवन कौशल ☆ Laughter Yoga at Nestle Nutrition Quality College ☆ Shri Jagat Singh Bisht & Smt Radhika Bisht

Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer,  Author, Blogger, Educator and Speaker.)   ☆ Laughter Yoga at Nestle Nutrition Quality College ☆ We conducted a session of Laughter Yoga followed by Laughter Meditation and Guided Relaxation at the Nestle Nutrition Quality College 2013, Samalkha, India. It included delegates from the Nestle head-quarters at Vevey, Switzerland, Sweden and zone Asia-Oceania-Africa countries including China, Singapore, Indonesia, Pakistan, Bangladesh, Sri Lanka and India. The participants felt deeply relaxed and cheerful after the session. One of them expressed, "There is a lot of stress in professional life. We laugh very rarely. Laughter Yoga is an amazing way to play and energize. It can do wonders at the workplace." Another participant shared, "I thought I am not going to laugh as I do not laugh often. After initial clapping and chanting, my inhibitions had gone away and I started laughing freely. I don't remember when I laughed like this last time." Last year, we were invited...
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आध्यात्म/Spiritual – श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – तृतीय अध्याय (20) प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ तृतीय अध्याय ( ज्ञानवान और भगवान के लिए भी लोकसंग्रहार्थ कर्मों की आवश्यकता )   कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः । लोकसंग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमर्हसि ।।20।।   जनक आदि ने कर्मो से ही सिद्धि सफलता पाई है जनहितकारी शुभ कर्मो ने सच में ख्याति दिलाई है।।20।।   भावार्थ :  जनकादि ज्ञानीजन भी आसक्ति रहित कर्मद्वारा ही परम सिद्धि को प्राप्त हुए थे, इसलिए तथा लोकसंग्रह को देखते हुए भी तू कर्म करने के ही योग्य है अर्थात तुझे कर्म करना ही उचित है।।20।।   Janaka and others attained perfection verily by action only; even with a view to the protection of the masses thou shouldst perform action. ।।20।।   © प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’  ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in मो ७०००३७५७९८   (हम प्रतिदिन इस ग्रंथ से एक मूल श्लोक के साथ श्लोक का हिन्दी अनुवाद जो कृति का मूल है के साथ ही गद्य में अर्थ व अंग्रेजी भाष्य भी प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।)  ...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ डॉ. मुक्ता का संवेदनात्मक साहित्य #1 ☆ अनचीन्हे रास्ते ☆ – डॉ. मुक्ता

डॉ.  मुक्ता (डा. मुक्ता जी हरियाणा साहित्य अकादमी की पूर्व निदेशक एवं  माननीय राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित/पुरस्कृत हैं।  हम डॉ.  मुक्ता जी  के  हृदय से आभारी हैं , जिन्होंने  साप्ताहिक स्तम्भ  "डॉ. मुक्ता का संवेदनात्मक  साहित्य" के लिए हमारे आग्रह को स्वीकार किया।  अब आप प्रत्येक शुक्रवार डॉ मुक्ता जी की उत्कृष्ट रचनों से रूबरू हो सकेंगे। आज प्रस्तुत है उनकी कविता  "अनचीन्हे रास्ते"। डॉ मुक्ता जी के बारे में कुछ  लिखना ,मेरी लेखनी की  क्षमता से परे है।  )   डॉ. मुक्ता जी का संक्षिप्त साहित्यिक परिचय - राजकीय महिला महाविद्यालय गुरुग्राम की संस्थापक और पूर्व प्राचार्य "हरियाणा साहित्य अकादमी" द्वारा श्रेष्ठ महिला रचनाकार के सम्मान से सम्मानित "हरियाणा साहित्य अकादमी "की पहली महिला निदेशक "हरियाणा ग्रंथ अकादमी" की संस्थापक निदेशक पूर्व राष्ट्रपति महामहिम श्री प्रणव मुखर्जी जी द्वारा ¨हिन्दी  साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए सुब्रह्मण्यम भारती पुरस्कार" से सम्मानित ।  डा. मुक्ता जी इस सम्मान से सम्मानित होने वाली हरियाणा की पहली महिला हैं। साहित्य की लगभग सभी विधाओं में...
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हिन्दी साहित्य- पुस्तक समीक्षा – ☆ कोहरे में सुबह ☆ श्री ब्रजेश कानूनगो – (समीक्षक – श्री दीपक गिरकर)

काव्य संग्रह  - कोहरे में सुबह - श्री ब्रजेश कानूनगो     ☆ उम्मीदों की रोशनी से जगमग करने वाला समकालीन रचनाओं का एक अनूठा काव्य संग्रह है “कोहरे में सुबह” ☆   “कोहरे में सुबह” चर्चित वरिष्ठ कवि-साहित्यकार श्री ब्रजेश कानूनगो की कविता यात्रा का चौथा पड़ाव हैं। इसके पूर्व इनके “धूल और धुएं के परदे में” (1999), “इस गणराज्य में” (2014), “चिड़िया का सितार” (2017) काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। “कोहरे में सुबह” एक ऐसा कविता संग्रह है जो कई मुद्दों और विषयों पर प्रकाश डालता है। श्री ब्रजेश कानूनगो ने अपने कविता संग्रह “कोहरे में सुबह” में अपने जीवन के कई अनुभवों को समेटने की कोशिश की है। “कोहरे में सुबह” उलझन भरे कोहरे में उम्मीदों की रोशनी से जगमग करने वाला एक अनूठा काव्य संग्रह है। ब्रजेशजी ज़मीन से जुड़े हुए एक वरिष्ठ कवि है। इस संग्रह में प्रकृति, प्रेम, गाँव और ग्रामीण जीवन की स्थितियों को अभिव्यक्त करती कविताएं हैं। यह समकालीन कविताओं का एक सशक्त दस्तावेज़ है। इस...
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मराठी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ – ☆ समाजपारावर एक विसावा…. !#1 – पुष्प पहिले …. ☆ – कविराज विजय यशवंत सातपुते

कविराज विजय यशवंत सातपुते   (समाज , संस्कृति, साहित्य में  ही नहीं अपितु सोशल मीडिया में गहरी पैठ रखने वाले  कविराज विजय यशवंत सातपुते जी  की  सोशल मीडिया  की  टेगलाइन "माणूस वाचतो मी......!!!!" ही काफी है उनके बारे में जानने के लिए। जो साहित्यकार मनुष्य को पढ़ सकता है वह कुछ भी और किसी को भी पढ़ सकने की क्षमता रखता है।  कई साहित्यिक,  सांस्कृतिक  एवं सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए कविराज विजय जी ने यह साप्ताहिक स्तम्भ "समाजपारावर एक विसावा.... !" शीर्षक से लिखने के लिए  हमारेआग्रह को स्वीकार किया, इसके लिए हम उनके हृदय से आभारी हैं। अब आप प्रत्येक शुक्रवार को उनके मानवीय संवेदना के सकारात्मक साहित्य को पढ़ सकेंगे।  आज इस लेखमाला की शृंखला में पढ़िये "पुष्प पहिले ...." । ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – समाजपारावर एक विसावा #-1 ☆  ☆ पुष्प पहिले .. .  ☆ समाज पारावर माणूस माणसाला भेटतो. माणसाचे अंतरंग  उलगडून  एक समाज स्पंदन वेचण्याचा अनोखा प्रयत्न या स्तंभलेखनातून  करणार आहे संवादी माध्यमातून सोशल नेटवर्किंग साईट वरुन वैचारिक देवाणघेवाण...
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योग-साधना LifeSkills/जीवन कौशल ☆ Laughter Yoga with Abercrombie & Kent ☆ Shri Jagat Singh Bisht

Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer,  Author, Blogger, Educator and Speaker.) ☆ Laughter Yoga with Abercrombie & Kent ☆ Abercrombie & Kent, the world’s leading authority on luxury and experiential travel, has discovered great value in Laughter Yoga. Their Executive Vice President Simon Laxton is looking at ways to bring this concept to their annual Las Vegas ‘highest level’ meeting and also the London one. Their Managing director of India, Vikram Madhok, has expressed an interest in using Laughter Yoga for cruise line tours and as part of their India Cultural Lecturer program. Dr Madan Kataria, the founder of Laughter Yoga movement, deputed us from Indore to showcase Laughter Yoga before senior level executives of Abercrombie & Kent at the picturesque city of Udaipur. Twenty-six delegates had gathered at Hotel Leela Palace Kempinski on the beautiful Pichola lake for their cruise conference 2013. One of the delegates exclaimed on the completion of the laughter session, “In the beginning, it seemed...
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