हिन्दी साहित्य – आलेख – ☆ आचार्य भगवत दुबे – व्यक्तित्व और कृतित्व ☆ – हेमन्त बावनकर

आचार्य भगवत दुबे (e-abhivyakti.com  में आज संस्कारधानी जबलपुर के आचार्य भगवत दुबे जी का स्वागत है एवं उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित इस आलेख को प्रस्तुत करते  हुए हम गौरवान्वित अनुभव करते हैं। अंतरराष्ट्रीय खातिलब्ध आपके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर संक्षिप्त में लिखना असंभव है। आपकी गिनती हिन्दी साहित्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर के साहित्य मनीषियों में होती है। आचार्य भगवत दुबे जी से दूरभाष इंटरव्यू एवं सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित आलेख।)  आपके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर 3 पी एच डी (4थी पी एच डी पर कार्य चल रहा है) तथा 2 एम फिल  किए गए हैं। डॉ राज कुमार तिवारी 'सुमित्र' जी के साथ रुस यात्रा के दौरान आपकी अध्यक्षता में एक पुस्तकालय का लोकार्पण एवंआपके कर कमलों द्वारा कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्रदान किए गए। बचपन से ही प्रतिभावन आचार्य जी अपने गुरुओं के प्रिय रहे हैं। वे आज भी अपनी उपलब्धियों का श्रेय अपने गुरुवर सनातन कुमार बाजपेयी जी को देते हैं  जिन्होने न सिर्फ उन्हें प्रोत्साहित किया...
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हिन्दी साहित्य – व्यंग्य – ☆ एक छोटी भूल ☆ – डॉ कुन्दन सिंह परिहार

डॉ कुन्दन सिंह परिहार ☆ एक छोटी भूल ☆ (प्रस्तुत है  डॉ  कुन्दन सिंह परिहार जी  की एक विचारोत्तेजक लघुकथा। )   हम एक शिविर में थे। शिविर बस्ती से दूर प्रकृति के अंचल में, वन विभाग की एक इमारत में लगा था। इमारत के अगल-बगल और सामने दूर  तक ऊँचे पेड़ थे। खूब छाया रहती थी।रात भर पेड़ हवा से सरसराते रहते। उस सबेरे हम चार लोग इमारत के पास टीले पर बैठे थे। दूर दूर तक पेड़ ही पेड़ थे और हरयाली। उनके बीच से बल खाती काली सड़क। कहीं कहीं इक्के दुक्के कच्चे घर। कुछ दूर पुलियाँ बन रही थीं। वहाँ कुछ हरकत दिखायी पड़ रही थी। शायद कोई इमारत बनाने की तैयारी थी। पटेल की सिगरेट ख़त्म हो गयी थी। उसे तलब लगी थी। करीब एक फर्लांग दूर सड़क के किनारे दूकान थी,  लेकिन पटेल अलसा रहा था। तभी पास से एक पंद्रह सोलह साल का लड़का निकला। पुरानी, गंदी, आधी बाँह की कमीज़ और पट्टेदार अंडरवियर। पटेल ने उसे बुलाया। पचास का नोट दिया,...
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हिन्दी साहित्य- कविता – ☆ पृथ्वी दिवस पर विशेष – विपदा भू पर आई ☆ – सुश्री मालती मिश्रा ‘मयंती’

सुश्री मालती मिश्रा ‘मयंती’ ☆ विपदा भू पर आई ☆ (अंतर्राष्ट्रीय पृथ्वी दिवस 22 अप्रैल पर विशेष   सुश्री मालती मिश्राजी  की  अतिसुन्दर सामयिक कविता।) धरती से अंबर तक देखो, घटा धुएँ की छाई। दसों दिशाएँ हुईं प्रदूषित, विपदा भू पर आई। नदियाँ नाले एक हो रहे, रहे धरा अब प्यासी। नष्ट हो रही हरियाली भी मन में घिरी उदासी। पीने का पानी भी बिकता, बाजारों  में भाई....... धरती से अंबर तक देखो, घटा धुएँ की छाई। हरियाली की चादर ओढ़े, थी धरती मुस्काती। लहर-लहर निर्मल धलधारा, देख सदा हर्षाती। वन-कानन अरु पर्वत ऊँचे, गौरव-भू कहलाते। मस्त पवन फिर दसों दिशा में, नित सौरभ फैलाते। मधुर भोर की शीतल बेला आज पड़े न दिखाई....... धरती से अंबर तक देखो, घटा धुएँ की छाई। उन्नति की खातिर मानव ने जंगल नदियाँ पाटे। हरियाली को छीन धरा से, नकली पौधे बाँटे। जहर घोलकर अब नदियों में बनाये कारखाने। धरती का सौंदर्य मिटा कर, मन ही मन  हर्षाने । अपने सुख खातिर मानव ने, भू की खुशी मिटाई....... धरती से अंबर तक देखो, घटा धुएँ की छाई। ©मालती मिश्रा 'मयंती'✍️ दिल्ली मो. नं०- 9891616087 ...
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मराठी साहित्य – मराठी कविता – 🍁 पळस 🍁 – सुश्री ज्योति हसबनीस

सुश्री ज्योति हसबनीस   पळस   अग्नीशिखा ही भुईवरची निसर्गाने सफाईने रोवली रेखीव रचना किमयागाराची आसमंत चितारून गेली   केशरी लावण्याचा दिमाख ऐन बहरातला मखमली सौंदर्याचा रूबाब निळ्या छत्रातला   पेटती मशाल ही रानातली की रंगभूल ही मनातली प्रणयातूर ऊर्मि जणू ही उत्सुक तप्त श्वासांतली   धगधगता अंगार क्रोधाचा जणू आसमंती झेपावला विखार अंतरीचा जणू अणूरेणूतून पेटला   जणू निखारे अस्तनीचे बाळगले विधात्याने आणि छत्र निळाईचे केले बहाल ममत्वाने   वाटेवरचा पळस खुप काही सांगून गेला ईश्वरी अगाधतेचा अमीट ठसा उमटवून गेला   ©  सौ. ज्योति हसबनीस    ...
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आध्यात्म/Spiritual – श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – द्वितीय अध्याय (50) प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ द्वितीय अध्याय साँख्य योग ( अर्जुन की कायरता के विषय में श्री कृष्णार्जुन-संवाद ) (कर्मयोग का विषय)   बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते । तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्‌ ।।50।। बुद्धिमान शुभ-अशुभ से रहता कोसों दूर अतः युद्ध कर योग है कर्मो से भरपूर।।50।।   भावार्थ :   समबुद्धियुक्त पुरुष पुण्य और पाप दोनों को इसी लोक में त्याग देता है अर्थात उनसे मुक्त हो जाता है। इससे तू समत्व रूप योग में लग जा, यह समत्व रूप योग ही कर्मों में कुशलता है अर्थात कर्मबंध से छूटने का उपाय है।।50।।   Endowed with wisdom (evenness of mind), one casts off in this life both good and evil deeds; therefore, devote thyself to Yoga; Yoga is skill in action. ।।50।।   © प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’  ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in मो ७०००३७५७९८ (हम प्रतिदिन इस ग्रंथ से एक मूल श्लोक के साथ श्लोक का हिन्दी अनुवाद जो कृति का मूल है के साथ ही गद्य में अर्थ व अंग्रेजी भाष्य भी प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।)  ...
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योग-साधना LifeSkills/जीवन कौशल ☆ The Happiness Formula ☆ Shri Jagat Singh Bisht

Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator and Speaker.) Happiness Activities​ Lesson 5  As we know by now, 50% of happiness is in our genes, 10% depends on the circumstances of life and the rest 40% can be cultivated by us by taking up activities, intentionally and voluntarily, that bring joy and happiness. These intentional activities we call Happiness Activities. You can find activities that fit your interests, your values and your needs. Let us classify and list a few activities to make it clear: Everyone needs to spare time regularly for at least one activity to take care of the body, mind and soul. It may be aerobics, yoga, meditation, walking, or any of the physical exercises. Stress is the major concern in modern life. One needs to learn how to cope with stress, trauma, and hardships of life. Finding flow and living in the present is the surest path to authentic happiness. You can choose a happiness activity that helps...
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ई-अभिव्यक्ति: संवाद-26 – डॉ प्रेम कृष्ण श्रीवास्तव – (साहित्यकार को सीमाओं में मत बांधे)

डॉ प्रेम कृष्ण श्रीवास्तव  अतिथि संपादक – ई-अभिव्यक्ति:  संवाद–26  (कल आपने डॉ मुक्ता जी के मनोभावों को ई-अभिव्यक्ति: संवाद-25 में अतिथि संपादक के रूप में आत्मसात किया। इसी कड़ी में मैं डॉ प्रेम कृष्ण श्रीवास्तव जी का हृदय से आभारी हूँ। उन्होने मेरा आग्रह स्वीकार कर आज के अंक के लिए अतिथि संपादक के रूप में अपने उद्गार प्रकट किए।डॉ प्रेम कृष्ण श्रीवास्तव जी ने  ई-अभिव्यक्ति:  संवाद–22  के संदर्भ में अपनी बेबाक राय रखी। यह सत्य है कि साहित्यकार को सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। साहित्यकार भौतिक जीवन के अतिरिक्त अपने रचना संसार में भी जीता है। अपने आसपास के चरित्रों या काल्पनिक चरित्रों के साथ सम्पूर्ण संवेदनशीलता के साथ। डॉ प्रेम कृष्ण जी का  हार्दिक आभार।) साहित्यकार को सीमाओं में मत बांधे  इसमें कोई संदेह नहीं कि साहित्यकार के पीछे उसका अपना भी कोई इतिहास, घटना/दुर्घटना अथवा ऐसा कोई तथ्य रहता है जो साहित्यकार में  भावुकता एवं संवेदनाएं ही नहीं उत्पन्न करता है, बल्कि उसे नेपथ्य में प्रोत्साहित अथवा उद्वेलित भी...
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English Literature – Poetry – ☆ To Meera ☆– Ms Neelam Saxena Chandra

Ms Neelam Saxena Chandra ☆ To Meera ☆ ( Ms. Neelam Saxena Chandra’ji succeeded to break illusion of Meera of so called Kaliyug.  If one can understand, it is a great message for woman.  Always pray almighty God Krishna but, don't wait for him to solve your problems. Only you have to solve your problems. The great poem with great message for everyone.)  Wake up Meera! If someone sends you a basket With cobra And names it as a basket of flowers, It won’t turn into a Krishna’s idol, A cobra it shall remain!   Wake up Meera! If you are delivered a cup of poison Stating that it is nectar, Even if you offer it to Krishna, Poison it shall remain And you shall die!   Wake up Meera! If you jump in a river, There shall be no Krishna To make you float; And drowning shall be your destiny!   Wake up Meera! Learn to survive on your own! Miracles don’t happen, And no one comes to save anyone- Seeing this ruthless, frigid and unsentimental world, Even the Krishnas have disappeared; You have to learn to swim And...
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हिन्दी साहित्य – व्यंग्य – ☆पकौड़ा डॉट कॉम ☆– श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ☆पकौड़ा डॉट कॉम ☆ (प्रस्तुत है श्री विवेक  रंजन  श्रीवास्तव जी  का  सटीक एवं सार्थक व्यंग्य। श्री विवेक जी ने जीभ से लेकर पेट तक और राजनीतिक पकौड़ों से लेकर ऑन लाइन तक कुछ भी नहीं छोड़ा। विवेक जी को ही नहीं मुझे भी भरोसा है कि कोई न कोई तो पकौड़ा डॉट कॉम पर काम कर ही रहा होगा जिसकी फ्रेंचाईजी विदेशों से लेकर हमारे घर के आस पास खुलेगी।)  पकौड़े विशुद्ध देसी  फास्ट फूड है. राजनीति ने पकौड़ो को  रोजगार से जोड़कर चर्चा में ला दिया है. मुझे भरोसा है जल्दी ही कोई स्टार्ट अप पकौड़ा डाट काम नाम से शुरू हो जायेगा. जो घर बैठे आनलाइन आर्डर पर पकौड़े उपलब्ध कराने की विशेषता लिये हुये होगा. वैसे दुनियां भर में खाने खिलाने का कारोबार सबसे सफल है. बच्चे का जन्म हो, तो दावत्, लोग इकट्ठे होते हैं, छक कर जीमतें हैं। बच्चे की वर्षगांठ हो, तो लोग इकट्ठे होते हैं- आशीष देते हैं-  खाते हैं, खुशी मनाते हैं....
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मराठी साहित्य – मराठी कविता – ☆ सुवास ☆ – श्री अशोक श्रीपाद भांबुरे

श्री अशोक श्रीपाद भांबुरे * सुवास * (प्रस्तुत है श्री अशोक श्रीपाद भांबुरे जी की एक  भावप्रवण कविता। मनोभावों  की अद्भुत एवं मोहक अभिव्यक्ति ।)    तुझा भावला स्पर्श श्वासातला जपू छान ठेवा प्रवासातला   तुझ्या प्रीतिचा परिघ मोठा जरी दिसेना कुठे टिंब व्यासातला   मरूही सुखाने मला देइना तुझा रेशमी दोर फासातला   खरी गोष्ट का ही तुला पाहिले ? पुन्हा चेहरा तोच भासातला   फुलातील गंधात न्हातेस तू कळे अर्थ आता सुवासातला   © अशोक भांबुरे, धनकवडी, पुणे. मो. ८१८००४२५०६, ९८२२८८२०२८ ashokbhambure123@gmail.com...
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