आध्यात्म / Spiritual – श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – प्रथम अध्याय (8) प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ प्रथम अध्याय अर्जुनविषादयोग ( दोनों सेनाओं के प्रधान शूरवीरों की गणना और सामर्थ्य का कथन ) भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जयः । अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च ॥ आप,भीष्म,कृप,कर्ण,सब अति उत्कृष्ट आधार अश्वत्थामा,सोम दत्ति औ" विकर्ण सरदार।।8।।   भावार्थ :  आप-द्रोणाचार्य और पितामह भीष्म तथा कर्ण और संग्रामविजयी कृपाचार्य तथा वैसे ही अश्वत्थामा, विकर्ण और सोमदत्त का पुत्र भूरिश्रवा ॥8॥   “Thyself and Bhishma, and Karna and Kripa, the victorious in war; Asvatthama, Vikarna, and Jayadratha, the son of Somadatta. ॥8॥   © प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’  ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी , रामपुर , जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in मो ७०००३७५७९८   (हम प्रतिदिन इस ग्रंथ से एक मूल श्लोक के साथ श्लोक का हिन्दी अनुवाद जो कृति का मूल है के साथ ही गद्य में अर्थ व अंग्रेजी भाष्य भी प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।)...
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योग-साधना LifeSkills/जीवन कौशल – 57 – Shri Jagat Singh Bisht

Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator and Speaker.)   It's important to think good, speak good, and do good. If we want to see positive change in the world, then we need to connect to goodness. LifeSkills Courtesy – Shri Jagat Singh Bisht, LifeSkills, Indore...
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हिन्दी साहित्य- कथा-कहानी – * “मैंने उस दर्द को सीने में छुपा रक्खा है” * – श्री जय प्रकाश पाण्डेय

श्री जय प्रकाश पाण्डेय "मैंने उस दर्द को सीने में छुपा रक्खा है" (प्रस्तुत है श्री जय प्रकाश पाण्डेय जी  की  एक सार्थक एवं मार्मिक -प्रेरणास्पद कथा।)  तुमने मुझसे पूछा है कि जब मैं 26 साल में विधवा हो गई थी तो फिर से प्रेम करके पुनर्विवाह क्यों नहीं कर लिया। संतान पैदा कर लेतीं, बुढ़ापे का सहारा हो जाता। चैन सुख से जीवन गुजर जाता। ये देशभक्ति, देश सेवा, समाजसेवा के चक्कर में क्यूं पड़ गईं ? तुम्हारे सवाल का जबाब देना थोड़ा मुश्किल सा है क्योंकि तुम नहीं समझ पाओगे, न्यायालय नहीं समझ पाया, जो अपने आपको देशभक्त कहते हैं ऐसे बड़े नेता नहीं समझ पाए। दरअसल 25 साल में मेरी शादी बीएसएफ के एक बड़े अधिकारी से हुई, शादी के बाद हम पति पत्नी ने तय किया था कि बच्चा दो साल बाद पैदा करेंगे, होने वाली संतान को ऐसे संस्कार देंगे कि वह बेईमानी, भ्रष्टाचार, लफ्फाजी का विरोध करे और उसके अंदर देशसेवा के लिए जुनून पैदा हो। शादी के बाद उनकी पोस्टिंग कुछ...
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हिन्दी साहित्य – कविता – * एक बूंद ….. एक नदी * – श्री नरेंद्र राणावत

श्री नरेंद्र राणावत   एक बूंद ….. एक नदी   पड़ती है एक बूँद पर्वत की चोटी पर,   सोचती है कोई आये मिले मुझसे भी,   वहीं बरसात की बूंदे आ टपकती है उस पर,   समर्पण भाव से बहकर झरने सी झर झर,   नही रुकती कहीं भी, कई पड़ावों से झुंझ कर,   गुजर जाती है उन पर्वतों से,   निर्माण कर एक नदी का,   बह जाती है धरातल के आंचल पर   © नरेंद्र राणावत   (सर्वाधिकार सुरक्षित) मूली चितलवाना, जिला-जालोर, राजस्थान...
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हिन्दी साहित्य – व्यंग्य – * नई थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी – रिलेटिंग मॉडर्न इंडिया विथ प्राचीन भारत * – श्री शांतिलाल जैन

श्री शांतिलाल जैन  नई थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी – रिलेटिंग मॉडर्न इंडिया विथ प्राचीन भारत (प्रस्तुत है श्री शांतिलाल जैन जी का नवीन , सटीक एवं सार्थक व्यंग्य ।  इसके संदर्भ में मैं कुछ लिखूँ/कहूँ इससे बेहतर है आप स्वयं पढ़ें और अपनी राय कमेन्ट बॉक्स में  दें तो बेहतर होगा।) समानान्तर नोबेल पुरस्कार समिति ने रसायन शास्त्र, भौतिकी और चिकित्सा विज्ञान श्रेणी में अलग अलग पुरस्कार देने की बजाए वर्ष 2019 का विज्ञान समग्र पुरस्कार प्रोफेसर रामप्रबोध शास्त्री को देने का निर्णय किया है. चयन समिति के वक्तव्य के कुछ अंश इस प्रकार हैं. प्रो. शास्त्री ने कौरवों के जन्म की मटका टेक्नोलॉजी को आईवीएफ टेक्नॉलोजी या टेस्ट ट्यूब बेबीज से रिलेट किया है. उन्होंने बताया कि उस काल में मटका-निर्माण की कला अपने चरम पर थी. कुम्भकार मल्टी-परपज मटके बनाया करते थे. गृहिणियों का जब तक मन किया मटका पानी भरने के काम लिया. जब संतान पाने का मन किया, उसी में फर्टिलाइज्ड ओवम निषेचित कर दिए. मटका टेक्नोलॉजी परखनलियों के मुकाबिल सस्ती पड़ती थी. सौ से...
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हिन्दी साहित्य – कविता – * चलो बुहारें….. * – डॉ सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’

डॉ  सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’   चलो बुहारें.....   चलो जरा कुछ देर स्वयं के अंतर में मुखरित हो जाएं अपने मन को मौन सिखाएं।   जीवन को अभिव्यक्ति देना शुष्क रेत में नौका खेना दूर क्षितिज के स्वप्न सजाए पंखहीन पिंजरे की मैना, बधिर शब्द बौने से अक्षर वाणी की होती सीमाएं। अपने मन को.....   बिन जाने सर्वज्ञ हो गए बिन अध्ययन, मर्मज्ञ हो गए भावशून्य, धुंधुआते अक्षर बिन आहुति के यज्ञ हो गए, समिधा बने, शब्द अंतस के गीत समर्पण के तब गायें। अपने मन को.....   तर्क वितर्क किये आजीवन करता रहा जुगाली ये मन रहे सदा अनभिज्ञ स्वयं से पतझड़ सा यह है मन उपवन, महक उठें महकाएं जग को क्यों न हम बसन्त बन जाएं। अपने मन को.....   कब तक भटकेंगे दर-दर को पहचानें सांसों के स्वर को खाली हों कल्मष कषाय से चलो बुहारें अपने घर को करें किवाड़ बन्द, बाहर के फिर भीतर, एक दीप जलाएं। अपने मन को....   © डॉ सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’...
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आध्यात्म / Spiritual – श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – प्रथम अध्याय (7) प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ प्रथम अध्याय अर्जुनविषादयोग ( दोनों सेनाओं के प्रधान शूरवीरों की गणना और सामर्थ्य का कथन )   अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम । नायका मम सैन्यस्य सञ्ज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते ॥ कौरव सेना का वर्णन- अपने पक्ष जो प्रमुख हैं,उन्हें सुनें व्दिज श्रेष्ठ निज सेना के नायकों में , जो परम् विशिष्ट।।7।।   भावार्थ :  हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! अपने पक्ष में भी जो प्रधान हैं, उनको आप समझ लीजिए। आपकी जानकारी के लिए मेरी सेना के जो-जो सेनापति हैं, उनको बतलाता हूँ॥7॥   “Know also,  O  best  among  the  twice-born,  the  names  of  those  who  are  the  most distinguished amongst ourselves, the leaders of my army! These I name to thee for thy information.॥7॥   © प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’  ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी , रामपुर , जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in मो ७०००३७५७९८   (हम प्रतिदिन इस ग्रंथ से एक मूल श्लोक के साथ श्लोक का हिन्दी अनुवाद जो कृति का मूल है के साथ ही गद्य में अर्थ व अंग्रेजी भाष्य भी प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।)...
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योग-साधना LifeSkills/जीवन कौशल – 56 – Shri Jagat Singh Bisht

Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator and Speaker.) Non-violence is the personal practice of being harmless to self and others under every condition. It comes from the belief that hurting people, animals or the environment is unnecessary to achieve an outcome and refers to a general philosophy of abstention from violence. LifeSkills Courtesy – Shri Jagat Singh Bisht, LifeSkills, Indore...
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English Literature – Book-Review/Abstract – The Frozen Evenings – Ms. Neelam Saxena Chandra

The Frozen Evenings The Frozen Evenings Poetry collection by Authorspress India, written by Ms. Neelam Saxena Chandra There are evenings which just freeze. You sit on the banks of the river called life and simply observe within. You neither contemplate, nor worry about the weight of memories, nor procrastinate; you are just there in those instants. You undertake a journey within and let the thoughts just surface like a bubble and then vanish with the flow. “The Frozen Evenings” is a collection of fifty poems that written by Limca Book of Records Holder, Neelam Saxena Chandra, in such moments. Excerpts from the book – The Frozen Evenings   THE POETRY Either the poetry Should be so soothing That you’d wish to spend One cool evening under its shade, Or it should be so beautiful That you’d long To pick a flower from its bed And enjoy its fragrance, Or it should be so romantic That you’d run to be In its embrace for long Or it should suffocate you Making you yearn For every drop of life Or it should arouse...
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हिन्दी साहित्य- लघुकथा – * “गम” ले * – डॉ . प्रदीप शशांक

डॉ . प्रदीप शशांक  "गम" ले  सिर पर रखी बड़ी टोकरी में तीन -चार गमले लिये एक  वृद्ध महिला कालोनी में " ले गमले .... ले गमले " की आवाज लगाती  हुई  आ रही थी । श्रीमती जी ने उसे आवाज देकर बुलाया ,उसके सर पर रखी टोकरी को अपने हाथों का सहारा देकर नीचे उतरवाया और उससे पूछा - "कितने के दिये ये गमले ?" उसने कहा- "ले लो बहन जी , 100 रुपये में एक गमला है ।" श्रीमतीजी ने महिला सुलभ स्वभाव वश मोलभाव करते हुए एक गमला 60 रुपये में मांगा । "बहिन जी , नही पड़ेगा । हम बहुत दूर से सिर पर ढोकर ला रहे हैं , धूप भी तेज हो रही है । जितनी जल्दी ये गमले बिक जाते तो हम घर चले जाते । आदमी बीमार पड़ा है घर पर ,उसके लिए दवाई भी लेकर जाना है । ऐसा करो बहिनजी ये तीनों गमले 250 रुपये में रख लो ।" श्रीमती जी ने कहा --"3 गमले रखकर क्या...
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