हिन्दी साहित्य- कविता – (गंगा) माँ से संवाद – श्री सदानंद आंबेकर

श्री सदानंद आंबेकर            (गंगा) माँ से संवाद (श्री सदानंद आंबेकर जी की हिन्दी एवं मराठी साहित्य लेखन में विशेष अभिरुचि है।  गायत्री तीर्थ  शांतिकुंज, हरिद्वार के निर्मल गंगा जन अभियान के अंतर्गत गंगा स्वच्छता जन-जागरण हेतु गंगा तट पर 2013 से  निरंतर प्रवास। हम श्री सदानंद आंबेकर जी  के आभारी हैं इस अत्यंत मार्मिक काव्यात्मक संवाद के लिए जो हमें ही नहीं हमारी अगली पीढ़ी के लिए भी एक संदेश है।  ) बैठे थे गंगा के तीरे शीतल मंद पवन बहती थी, आओ पथिक शांत हो बैठो, कानों में वह ये कहती थी। कलरव करते पंछी उड़ते, नभमंडल को जाते थे जाने किस अनगढ़ बोली में, गीत कहाँ के गाते थे। मेला लगा हुआ ज्यों तट पर, नर नारी की रेलमपेल डुबकी लेते छप छप करते, पानी में वो खेले खेल। जटा खोल कर भस्म लगा कर साधू बाबा ध्यान लगाये मंदिर में कोई श्रद्धा से, घंटी के संग शंख बजाये। मन्नत पूरी करने कोई, जल में दीप चढ़ाते थे तन के संग संग मन धोने को, मल मल खूब नहाते थे। इस हलचल में,...
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योग-साधना LIFESKILLS/जीवन कौशल –The Wheel of Happiness & Well-being – Smt Radhika Jagat Bisht and Shri Jagat Singh Bisht

The Wheel of Happiness & Well-being   Smt. RadhikaJagat Bisht and Shri Jagat Singh Bisht, Founders: LifeSkills, will travel across India during the next year (2019) to conduct ‘The Wheel of Happiness & Well-Being’ - an activity based, multi-dimensional, complete program on the HOW of happiness. It may be conducted in parks, workplaces, homes, clubs, resorts, community centres, schools, colleges, auditoriums, hospitals, prisons – practically anywhere. If you wish to invite us for a programme in your town, please send us an email at lifeskills.happiness@gmail.com. Smt. RadhikaJagat Bisht and Shri Jagat Singh Bisht, Founders: LifeSkills,...
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योग-साधना LIFESKILLS/जीवन कौशल-30 –SHRI JAGAT SINGH BISHT

Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator and Speaker.) Martin Seligman, known as the father of Positive Psychology, developed the PERMA model, which identifies the five things necessary for wellbeing. PERMA stands for positive emotion (P), engagement (E), relationships (R), meaning (M) and achievement (A). LifeSkills Courtesy – Shri Jagat Singh Bisht, LifeSkills, Indore...
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हिन्दी साहित्य- कविता – ताले… रास्ता देखते हैं – श्री विवेक चतुर्वेदी

श्री विवेक चतुर्वेदी (श्री विवेक चतुर्वेदी जी की यह कविता बेहद अद्भुत है और इसे साझा करते समय यह विचार मन में है कि किस प्रकार यह कविता आज के आपाधापी के जीवन में हमारे संवेदना के सरोकारों को छू जाती है।  कवि कहता है कि- ताले रास्ता देखते हैं सदियों को याद करते हैं,  ताले इस प्रकार आज के दौर की एकांकी जीवन शैली को कवि ने छुआ है वह अद्भुत है।  जार जार बीते समय को देखते हुए डाले दिन हफ्ते महीने और वर्षों का हिसाब रखते हैं और हद यह है कि यह ताले रास्ता देख कर एक अनोखे अंदाज में कविता इस दिशा में मूर्ति है जब कवि ताले की चाबी की बात करता है और कहता है कभी नहीं भी लौट पाती कोई चाबी यहां पर इंतजार की वेदना अपने चरम पर होती है कल विवेक चतुर्वेदी की कविता में चाबी  बटुए के चोर रास्तों से निकल भागती या फिर रास्ते में गिर कर दूर हो...
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हिन्दी साहित्य- कविता – यह जो विधान भवन है न – डॉ गंगाप्रसाद शर्मा ‘गुणशेखर’

डॉ गंगाप्रसाद शर्मा 'गुणशेखर'  (डॉ गंगाप्रसाद शर्मा 'गुणशेखर' पूर्व प्रोफेसर (हिन्दी) क्वाङ्ग्तोंग वैदेशिक अध्ययन विश्वविद्यालय, चीन) यह जो विधान भवन है न  एक दिन मेरी माँ आँगन में बने मिट्टी के चूल्हे से इकलौती बची लकड़ी खींचते हुए  कह रही थी 'यह जो विधानभवन है न अपने प्रदेश का यहाँ बहुत बड़ा जंगल था कभी शेर,बाघ,भालू ,भेड़िए और लोमड़ी तक निर्द्वंद्व रहते थे इनमें पेड़ों पर छोटी चिड़ियों से लेकर तोतों और कबूतरों के झुंड के झुंड बसा करते थे उसमें बाजों और  गिद्धों के डेरे रहते थे जंगल कटा तो सब जानवर उसी भवन में छिप गए ' और चिड़ियां? आँगन में एक रोटी के इंतज़ार में बैठे-बैठे मैंने पूछ ही लिया तपाक से बोली ,'देखो न आँगन में कौन मंडरा रही हैं चोंच भर आटे की फिराक में और तोते ,कबूतर आदि? इस पर माँ बोली 'इन्हें बाज और गिद्ध खा गए' और गिद्धों को कौन खा गया माँ ? इतना सुनते ही माँ बिफर पड़ी 'इंसान और कौन बेटा ?' © डॉ गंगाप्रसाद शर्मा 'गुणशेखर'  ...
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योग-साधना LifeSkills/जीवन कौशल–Meditation: Breathing with the Body – Learning Video 4 -Shri Jagat Singh Bisht

MEDITATION: BREATHING WITH THE BODY Learning Video #4 This is the fourth video in a series of videos - a step-by-step tutorial - to learn and practice meditation by yourself by listening to and following the instructions given in the video. In this session, we are re-visiting and deepening what we have learned in the three earlier videos. Instructions: Please sit down - legs folded crosswise, back straight and eyes closed. Focus your attention on the nostrils as you breathe in and as you breathe out. In this session, we will re-visit and deepen what we have learned earlier. Begin by simply bringing attention to the breathing. Always mindful of your breath, breathe in; mindful, breathe out. If you breathe in long, know: I am breathing in long. If you breathe out long, know: I breathe out long. If you breathe in short, know: I am breathing in short. If you breathe out short, know: I breathe out short. Don’t worry if your mind wanders away, bring it back gently. Observe your...
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हिन्दी साहित्य – आलेख – आत्मनिर्भरता ही आत्मविश्वास की पहली सीढ़ी – सुश्री ऋतु गुप्ता

सुश्री ऋतु गुप्ता   आत्मनिर्भरता ही आत्मविश्वास की पहली सीढ़ी (सुश्री ऋतु गुप्ता जी के लेख ,कहानी व कविताएँ विभिन्न समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं।दैनिक ट्रिब्यून में जनसंसद में आपको लेख लिखने के लिए कई बार प्रथम पुरस्कार मिला है। आपका एक काव्य संग्रह 'आईना' प्रकाशित हो चुका है। दो किताबें प्रकाशन के लिए तैयार हैं। प्रस्तुत है सुश्री ऋतु जी का यह प्रेरणास्पद लेख।) मैनें अपनी जिंदगी से चाहे कुछ सीखा हो या न पर एक बात जरूर सीखी है कि- अगर आत्मविश्वास प्रबल है तो जीत निश्चित है।आत्मविश्वास का अर्थ यही है कि अपने ऊपर विश्वास या फिर यह भी कह सकते हैं कि अपने द्वारा किये जाने वाले कार्यों पर पूर्ण विश्वास। इंसान को जब तक यह लगता है कि वह हर कार्य करने में सक्षम व समर्थ है तब उसका अपने ऊपर विश्वास बना रहता है और यह जीवनरूपी गाड़ी सरपट दौड़ती रहती है,जैसे ही अपने ऊपर से भरोसा डगमगाता है तो उसकी स्थिति पंक्चर टायर वाली गाड़ी...
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पुस्तक समीक्षा / आत्मकथ्य – ग़ुलामी की कहानी – श्री सुरेश पटवा 

आत्मकथ्य - ग़ुलामी की कहानी - श्री सुरेश पटवा  ('गुलामी की कहानी'  श्री सुरेश पटवा की प्रसिद्ध पुस्तकों में से एक है। आपका जन्म देनवा नदी के किनारे उनके नाना के गाँव ढाना, मटक़ुली में हुआ था। उनका बचपन सतपुड़ा की गोद में बसे सोहागपुर में बीता। प्रकृति से विशेष लगाव के कारण जल, जंगल और ज़मीन से उनका नज़दीकी रिश्ता रहा है। पंचमढ़ी की खोज के प्रयास स्वरूप जो किताबी और वास्तविक अनुभव हुआ उसे आपके साथ बाँटना एक सुखद अनुभूति है।  श्री सुरेश पटवा, ज़िंदगी की कठिन पाठशाला में दीक्षित हैं। मेहनत मज़दूरी करते हुए पढ़ाई करके सागर विश्वविद्यालय से बी.काम. 1973 परीक्षा में स्वर्ण पदक विजेता रहे हैं और कुश्ती में विश्व विद्यालय स्तरीय चैम्पीयन रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक से सेवा निवृत सहायक महाप्रबंधक हैं, पठन-पाठन और पर्यटन के शौक़ीन हैं। वर्तमान में वे भोपाल में निवास करते हैं। आप अभी अपनी नई पुस्तक 'पलक गाथा' पर काम कर रहे हैं। प्रस्तुत है उनकी पुस्तक गुलामी की कहानी पर उनका आत्मकथ्य।) यह...
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योग-साधना LifeSkills/जीवन कौशल–Meditation: Calming the Body – Learning Video 3-Shri Jagat Singh Bisht

MEDITATION: CALMING THE BODY Learning Video #3 This is the third video in a series of videos - astep-by-step tutorial - to learn and practice meditationby yourself by listening to and following the instructions given in the video. It gives simple and straight instructions to meditate in pure form. Just follow the instructions and meditate. You may start your journey of meditation right from here but we would advise you to begin with the first video of the series on this channel and then come here after some days of practice. Practice meditation on a daily basis listening to the video. We will be happy to have your feedback and would answer any questions that you may have. Questions may be sent to us at lifeskills.happiness@gmail.com. Instructions: Please sit down - legs folded crosswise, back straight and eyes closed. Always be mindful of your breath as you breathe in; mindful, as you breathe out. Focus your attention on the nostrils as you breathe in and as you breathe out. If...
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हिन्दी साहित्य- कविता – नारी तू सृजनहार – सुश्री मालती मिश्रा

सुश्री मालती मिश्रा             कविता - नारी तू सृजनहार  (यह कविता  सुश्री मालती मिश्रा जी के काव्य -संग्रह  ‘अन्तर्ध्वनि 'की शीर्ष कविताओं में से एक है। हमने कल इस पुस्तक की समीक्षा प्रकाशित की थी। हमें पूर्ण विश्वास है आपको निश्चित ही यह कविता पसंद आएगी।  सुश्री मालती मिश्रा जी ने इस कविता में नारी को नारी शक्ति का एहसास दिलाने की चेष्टा की है।   नारी की अस्मिता आज क्यों हो रही है तार-तार, क्यों बन राक्षस नारी पर करते प्रहार यूँ बारम्बार।   क्यों जग जननी यह नारी जो स्वयं जगत की सृजनहार, दुष्ट भेड़ियों के समक्ष क्यों पाती है खुद को लाचार।   क्यों शिकार बनती यह जग में नराधम कुंठित मानस का, क्यों नहीं बनकर यह दुर्गा करती स्वयं इनका शिकार।   जो नारी जन सकती मानव को क्या वह इतनी शक्तिहीन है, क्यों नहीं दिखाती अपना बल यह क्यों नहीं दिखाती यम का द्वार।   सुन हे अबला अब जाग जा पहचान तू अपने आप को, पहचान ले अपनी शक्तियों कों त्याग दे दुख संताप को।   नहीं बिलखने से कुछ होगा दया की आस तू अब छोड़, उठने वाले हाथों को तू बिन सोचे अब दे मरोड़।   जो...
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